याेगी का सेवक बना 10 हजार का इनामी

कभी मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ के कदमों से कदम मिलाकर चलने वाला सेवक आज अपनी परछाई से पीछा छुड़ा रहा है। जी, हां एेसा ही एक मामला प्रदेश के गाेरखपुर से सामने आया है। जहां बीजेपी पार्षद साैरभ विश्वकर्मा काे 10 हजार का इनामी घाेषित किया गया है। जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस जगह जगह दबिश दे रही है।

31 जुलाई को थाना राजघाट में योगी के संगठन हिन्दू युवा वाहिनी और सुनील सिंह द्वारा बनाए गए हिन्दू युवा वाहिनी भारत के बीच फेसबुक पर टिप्पणी काे लेकर विवाद हाे गया। मामला इस कदर गर्माया कि राजघाट थाने पंहुचा गया।

थाने में देखते ही देखते मामला हंगामे में तब्दील हो गया और पत्थरबाजी के बाद लाठीचार्ज की नौबत आ गई। जिसके बाद वहां पर तत्काल दर्जनों की संख्या में हिन्दू युवा वाहिनी भारत संगठन के लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्जकर उनकी गिरफ्तारी की गई।

जिसमें मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह और चन्दन सिंह सहित दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसी में सौरभ विश्वकर्मा जो कि बीजेपी पार्षद है। उनका भी नाम शामिल है, लेकिन वह अभी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। जिसके चलते पुलिस ने उनपर 10 हजार का ईनाम घोषित किया है।

बता दें कि बीजेपी सभाषद सौरभ विश्वकर्मा, चन्दन विश्वकर्मा आैर शेखर विश्वकर्मा तीनों भाई हैं। तीनों भाई कभी योगी आदित्यनाथ के साथ कदम से कदम मिलाकर चला करते थे। आज दोनाें भाई( चन्दन विश्वकर्मा आैर शेखर विश्वकर्मा) जेल में है और पार्षद (सौरभ विश्वकर्मा) फरार हैं जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने ईनाम घाेषित किया है।

सौरभ के परिवार वालाें ने आराेप लगाया है कि पुलिस गलत काम कर रही है। पल भर में एक जनप्रतिनिधि को 10 हजार का इनामी अपराधी बना दिया गया, क्या कसूर है? योगी आदित्यनाथ के साथ अपनी जिन्दगी के आधे वक्त गुजार देने की ये सजा है या इनाम।

बता दें कि जेल में बंद सभी आराेपियाें के परिवार हाथ जोड़कर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ से इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि 31 जुलाई को थाना राजघाट में हुए विवाद के बाद तमाम लोगों पर इस तरह की कार्रवाई की गई है। बाकी दो लोगों पर रासुका की भी कार्रवाई की गई है। बाकी फरार लोगों की भी तलाश की जा रही है।

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