विश्व साक्षरता दिवस : 6 करोड़ से ज्यादा बच्चे आज भी नहीं जाते स्कूल

वैज्ञानिक और सास्कृतिक संगठन (UNESCO) ने 7 नवंबर 1965 के दिन सयुक्त राष्ट्र संघ ने शिक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने तथा विश्व भर के लोगों का इस तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतिवर्ष 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय/ विश्व साक्षरता दिवस मनाने का निर्णय लिया गया. जो 1966 से शुरू होकर 2017 विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर आयोजित किया जाता रहा हैं.

अधिकतर सामाजिक समस्याओं की जड़ अशिक्षा हैं. साक्षरता के अभाव में किसी भी देश की तरक्की संभव नही हैं. चाहे स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, कौशल विकास, आर्थिक और तकनीकी विकास के क्षेत्रों में साक्षरता अहम भूमिका निभाती हैं. पश्चिम एशिया तथा कुछ अफ़्रीकी राष्ट्र जो 20 सदी में आजाद हुए, उनकी साक्षरता दर खासकर महिला साक्षरता दर 50% के आस-पास हैं. जो बेहद चिंताजनक हैं. भारत के पिछड़े तथा आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की स्थति भी इस तरह ही हैं.

भारत भी आज दुनिया के तमाम देशों की तरह 51वां विश्व साक्षरता दिवस मना रहा है, तो इस मौके पर राष्ट्रों की तरक्की में साक्षरता की केंद्रीय भूमिका की तरफ मैं आप सबका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। यह वह दिन है, जब हम अपने स्वतंत्रता संघर्ष और महात्मा गांधी के शब्दों को याद कर सकते हैं, जिन्होंने कहा था कि अशिक्षा एक अभिशाप और शर्म है, जिसे मुक्ति पाई जानी ही चाहिए। यह वह दिन है, जब हम अपनी स्वतंत्रता के 70 वर्षों की तरक्की पर निगाह डाल सकते हैं। पंडित नेहरू ने 15 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि को बड़े ही सार्थक शब्दों में कहा था, ‘आम आदमी को आजादी व अवसर मुहैया कराने के लिए और सामाजिक-आर्थिक व राजनीतिक संगठनों के सृजन के लिए, जो देश के हरेक पुरुष व स्त्री को इंसाफ व आनंदपूर्ण जीवन की गारंटी दे’ हमें विकास के मार्ग पर कदम बढ़ाने की जरूरत है।

हमने इन वर्षों में जो तरक्की की सीढ़ियां चढ़ी हैं, जो मील के पत्थर गाड़े हैं, उन्हें गर्व से देख सकते हैं। 1947 में देश जब आजाद हुआ था, तब महज 18 प्रतिशत भारतीय लिख-पढ़ सकते थे। आज करीब 74 फीसदी भारतीय साक्षर हैं। 95 प्रतिशत से भी अधिक बच्चे स्कूल जा रहे हैं और 86 फीसदी नौजवान कामकाज के लायक शिक्षित हैं। यह कोई कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। हालांकि, हमें अपनी पुरानी सफलताओं से प्रेरणा लेते हुए भविष्य की ओर अग्रसर होना है।

निस्संदेह, हमें अभी लंबी दूरी तय करनी है। हम इस तथ्य की भी अनदेखी नहीं कर सकते कि करीब 35 करोड़ युवा व प्रौढ़ शिक्षा की दुनिया से बाहर हैं, और इसके कारण भारत की तरक्की और विकास में वे कोई सार्थक भूमिका नहीं निभा पा रहे। इसके अलावा करीब 40 प्रतिशत स्कूली बच्चे प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद भी बुनियादी साक्षरता कौशल से वंचित रह जाते हैं। हमारे  सामने एक बड़ी चुनौती है, जिससे हमें व्यवस्थित रूप से निपटना है।

मानव विकास और समाज के लिये उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है. इस बात से पीछे नहीं हटा जा सकता है कि सफलता और जीने के लिये साक्षरता महत्वपूर्ण है.भारत में या देश-दुनिया में गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरुरी है. ये क्षमता सिर्फ साक्षरता में है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है. साक्षरता दिवस लगातार शिक्षा को प्राप्त करने की ओर लोगों को बढ़ावा देने के लिये और परिवार, समाज तथा देश के लिये अपनी जिम्मेदारी को समझने के मनाया जाता है.

इस दिन को एक कार्यक्रम के रूप में मनाना भी पर्याप्त नही हैं. स्थानीय, निकायी और राष्ट्रिय सरकारों को भी साक्षरता दर में बढ़ोतरी हेतु सकारात्मक कदम और योजनाएं बनानी होगी. भारत में सर्व शिक्षा अभियान इस दिशा में उत्कृष्ट कदम हैं.

शिक्षा के क्षेत्र में यदि हम वैश्विक परिद्रश्य को देखे तो करीब 80 करोड़ से अधिक युवा अभी तक शिक्षा से नही जुड़ जाए हैं. इतनी बड़ी आबादी में अशिक्षित रहने वाले लोगों में सबसे अधिक संख्या महिलाओं की हैं. यानि प्रति 3 में से 2 महिलाएं या तो पूर्ण रूप से अशिक्षित हैं अथवा वो नियमित रूप से शिक्षा ग्रहण नही कर पाई हैं.

अक्सर प्राथमिक या उच्च प्राथमिक स्तर तक आते आते लड़कियों को स्कुल भेजना बंद कर दिया जाता हैं. समाज की यह सोच चिंता का विषय हैं. दूसरी तरफ 6 से 14 वर्ष की आयु के 8 करोड़ ऐसे बच्चे हैं जो शिक्षा से पूर्ण रूप से कटे हुए हैं. या तो वे बाल मजदूरी करते है अथवा उन्हें घर के काम में ही लगा दिया जाता हैं. इस प्रकार की स्थति से कैसे निकला जाए, कैसे अधिक से अधिक लोगों तक शिक्षा के संदेश को पहुचाया जाए. इस दिशा में विश्व साक्षरता दिवस स्वागत योग्य पहल हैं.

शिक्षा के प्रति जागरूक हो जो अभी तक इससे नही जुड़ पाए हैं. उचित तरीके से प्राप्त की गई शिक्षा व्यक्ति को न ज्ञान देती हैं बल्कि उन्हें नौकरी व् व्यवसाय को अच्छे तरीके से करने के योग्य भी बनाती हैं. सरकारों ने हर वर्ष आयोजित साक्षरता दिवस पर आकर्षक थीम के जरिये लोगों का ध्यान इस तरफ आकर्षित करने का प्रयत्न किया हैं. पिछले कुछ वर्षो में साक्षरता दिवस की थीम इस प्रकार रखी गई.

  • साक्षरता एवं सतत सोसायटी
  • साक्षरता और सतत विकास
  • स्वास्थ्य और साक्षरता
  • साक्षरता और शांति
  • शिक्षा से सामाजिक सुधार, आर्थिक वृद्धि और पर्यावरण सुरक्षा
  • सशक्तीकरण और साक्षरता
  • साक्षरता और लैगिक समानता
  • 21वीं सदी के लिये साक्षरता
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