स्थिति को संभालने में नाकाम रहा BHU प्रशासन : अंतरिम जांच रिपोर्ट

वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुए बवाल की जांच पूरी हो चुकी है. कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है. कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में बवाल बढ़ने के लिए बीएचयू प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है.

वाराणसी कमिश्नर नितिन गोकर्ण ने चीफ सेकेट्ररी राजीव कुमार को दी गई अपनी रिपोर्ट में बताया कि बीएचयू के प्रशासन ने पीड़ित की शिकायत पर ढंग से कार्रवाई नहीं की और ना ही हालात को सही तरीके से संभाला गया. बता दें कि BHU में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के बाद किए जा रहे धरना प्रदर्शन और विरोध से माहौल काफी बिगड़ गया था.  

पिछले कई दिनों से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सुर्खियों में है. तमाम आरोप-प्रत्यारोप के बीच सियासी दल के नेता भी अपनी रोटी सेकने में लगे हैं. प्रधानमंत्री का क्षेत्र होने के चलते बनारस ने कई कारणों से खूब सुर्खियां बटोरी है.

इस पूरे सियासी शोरगुल में कहीं ना कहीं उन छात्रों की आवाज दब के रह गई है जो लगातार 3 दिन तक एक पीड़िता के साथ हुई छेड़खानी के लिए धरना दे रहे थे. आज उनको लगता है कि उनका वजूद खतरे में है, लेकिन जो बवाल सड़कों पर उतर कर आया वह कोई एक दिन की 1 महीने की या 1 साल की पीड़ा नहीं है. यह उफ़ान है कई सालों का है. देखते-देखते बीएचयू हैवानियत का एक गढ़ बन गया. रात के अंधेरे में हो, शाम के साए में हो या फिर सुबह की चकाचौंध में मनचलों के लिए तो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी का विशाल कैंपस एक स्वर्ग सा बन गया.

कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण और जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी को पत्र भेजकर यह सुझाव दिया है। कानून व्यवस्था और छात्र-छात्राओं की समस्याओं के समाधान में हर स्तर पर सहयोग की बात कही है.

उन्होंने कहा है कि सीसीटीवी कैमरे लगवाने में यदि धन की कमी आएगी तो इसके लिए निर्भया फंड से धन मुहैया कराया जाएगा। कमिश्नर और डीएम ने सोमवार को भेजे पत्र में कहा है कि छात्र एवं छात्राओं की समस्याओं का समाधान पूरी तत्परता से कराया जाना जरूरी है.

‘विशाखा’ प्रकरण के अलावा उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की ओर से दी गई विधि व्यवस्था के अनुसार एक समिति बनाई जाए, जिसमें छात्राओं का भी समुचित प्रतिनिधित्व हो। यह समिति समयबद्ध रूप से कुलपति को अपनी आख्या दे और उसके अनुरूप विश्वविद्यालय प्रशासन कार्रवाई करे.

विश्वविद्यालय कैंपस के सभी निकास, प्रवेश द्वार, समस्त छात्रावासों और महिला छात्रावासों को विशेष रूप से सीसीटीवी नेटवर्क से जोड़ा जाए। प्रॉक्टोरियल बोर्ड एवं विश्वविद्यालय के संबंधित निकाय द्वारा टीम बनाकर परिसर में आकस्मिक चेकिंग की जाए.

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