अमेरिकी विशेषज्ञ की चीन को चेतावनी- “भारत से न उलझें वरना परिणाम बुरे हो सकते हैं”

डोकलाम में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनातनी से दोनों देशों के बीच रिश्तों में तल्खी बढ़ गई है। चीनी अखबारों में धमकी भरे लहजे में सबक सिखाने की बातें लिखी जा रही हैं। ऐसे में एक अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा है कि भारत को सबक सिखाने की धमकियां देने से पहले चीन को 1979 के वियतनाम युद्ध से सबक लेना चाहिए। परमाणु शक्ति संपन्न भारत से उलझने से चीन मुश्किल में पड़ सकता है।

अमेरिका के नेशनल सिक्युरिटी एनालिस्ट और लेखक गिलबर्टो विल्लहरमोसा का कहना है कि 1979 में चीन ने सीमा विवाद को लेकर वियतनाम को सबक सिखाने के लिए लड़ाई शुरू की थी लेकिन वह उसके लिए बुरा साबित हुआ, चीनी सेना की कई खामियां सामने आ गईं। चीनी सैनिक उस युद्ध को ‘दर्दनाक सीमित युद्ध’ या ‘घोस्ट वॉर’ के रूप में याद करते हैं। काफी समय तक वियतनाम और रूस से चीन के रिश्ते खराब हो गए।

अमेरिकी सेना में काम कर चुके विल्लहरमोसा एक पूर्व चीनी सैनिक जिआओबिंग ली के हवाले से बताते हैं कि वियतनाम सीमा संघर्ष के समय कई चीनी अधिकारी सैनिकों में अनुशासनहीनता, कमजोर मनोबल, लड़ने की अक्षमता और अधिक संख्या में सैनिकों के हताहत होने से हैरान रह गए थे। उस संघर्ष में करीब 26 हजार सैनिक हताहत हुए थे।

हालांकि चीन ने दावा किया था कि उसने 37,300 वियतनामी सैनिकों को मारा और 2300 को कब्जे में ले लिया। इस संघर्ष में चीन के 420 टैंक और सैन्य वाहन तबाह हो गए जबकि वियतनाम के 185 ही हुए। वियतनाम मानता है कि उसने चीनी सेना को कड़ा सबक सिखाया था। अधिकतर यूरोपीय विश्लेषकों का भी मानना है कि वियतनामी सेना ने चीनी सैनिकों से जोरदार लोहा लिया था और उन पर भारी पड़े थे।

विल्लहरमोसा ने लिखा है कि चीन को भारत को हल्के में नहीं लेना चाहिए। आज की भारतीय सेनाएं 1979 की वियतनामी सेनाओं की जैसी नहीं हैं। भारतीय सेना बेहतर तरीके से प्रशिक्षित, संगठित, हथियारों से सुसज्जित और सक्षम नेतृत्व वाली हैं। भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है, उसके पास करीब 100 परमाणु हथियार हैं।   रसायनिक हथियार भी हैं। अगर कोई देश भारत के खिलाफ युद्ध जैसा कदम उठाने की  सोचता है, चाहे वह आधुनिक और ताकतवर चीनी सेना ही क्यों न हो, वास्तव में वह मुश्किल में पड़ सकता है। उसके लिए यह शर्मनाक हो सकता है।

विल्लहरमोसा ने चीन को याद दिलाते हुए लिखा है कि भारत अमेरिका और रूस का सबसे मजबूत साझेदार है। अगर चीन भारत के खिलाफ कोई भी छोटा युद्ध छेड़ने की कोशिश करता है तो यह अमेरिका या रूस को बीजिंग के खिलाफ कार्रवाई करने को मजबूर करेगा। वे भारत को हथियारों की आपूर्ति और खुफिया जानकारी साझा करेंगे।

अमेरिकी नेशनल सिक्युरिटी कमेंटेर का कहना है कि संघर्ष का खतरा इस क्षेत्र से बाहर और आगे चला जाएगा। पाकिस्तान चीन के भारत के साथ संषर्घ का फायदा उठाने की कोशिश कर सकता है। वह स्वयं भारत पर हमला कर सकता है। पाकिस्तान को दूसरे मोर्चे पर फंसा देखकर अफगानिस्तान पाकिस्तान पर हमले का फैसला कर लेगा। अंतत: वियतनाम समेत चीन के अन्य विरोधी देश उसके खिलाफ एशिया में एक सैन्य गठजोड़ बना सकते हैं। अगर चीन भारत के खिलाफ सीमित छोटी कार्रवाई करता है तो वह आसानी से अनियंत्रित हो जाएगा, इसलिए चीन सीमा पर भारत के खिलाफ जितना बुरा सोचता है, वह 1979 के चीन वियतनाम संघर्ष से भी बुरा सबक होगा।

चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में भी लिखा गया था कि अगर भारत ने सीमा विवाद को बढ़ाया तो उसे 1962 की लड़ाई से ज्यादा नुकसान उठाना होगा। उसमें भारत को एक कड़ा सबक सिखाने की भी बात कही गई थी। हालांकि रक्षा विशेषज्ञ विल्लहरमोसा को चीन और भारत के सैनिकों के बीच संघर्ष पर संदेह है।

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