पिता जज थे बेटा बना वकील, 628 को उम्रकैद, 37 को दिलाई फांसी की सजा

1993 के चर्चित मुंबई ब्लास्ट मामले में विशेष टाडा अदालत ने पांच दोषियों को सजा का ऐलान कर दिया है। यासीन मर्चेंट और फिरोज खान को कोर्ट ने फांसी और अबू सलेम सहित दो लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि एक दोषी को दस साल की सजा का ऐलान किया गया है।
24 साल लंबे चले इस केस में सभी दोषियों को सजा दिलाने में एक व्यक्ति का सबसे अहम योगदान रहा, वो हैं सरकारी वकील उज्जवल निकम। निकम ने ही अभियोजन की ओर से इस केस की पैरवी की, उनके दमदार तर्कों और कोर्ट के सामने पेश किए गए साक्ष्यों की बदौलत मामले के सभी दोषियों को एक-एक कर सजा मिलती गई।

62 साल के उज्जवल निकम को आतंकवाद संबंधी मामलों का मास्टर माना जाता है, मुंबई में निकम के बारे में कहा जाता है कि वह जिस केस को हाथ में ले लें उसमें गुनहगार सजा से नहीं बच सकता। इसके आंकड़े भी उनकी काबिलियत साबित करते हैं, तीस साल के कॅरियर में निकम अभी तक 628 गुनहगारों को उम्रकैद और 37 को फांसी की सजा दिलवा चुके हैं।

उज्जवल निकम पहली बार चर्चा में तब आए जब 26/11 के मुंबई हमले में पकड़े गए एकमात्र जिंदा आतंकी अजमल कसाब का केस उन्हें सौंपा गया। कोर्ट में चलती जिरह के बाद निकम बाहर आते तो मीडिया के कैमरे उन्हें घेर लेते।

निकम पूरी बेबाकी और बेखौफ होकर उनके जवाब देते, लगता ही नहीं कि वह देश के सबसे बड़े मुकदमे में सरकार की पैरवी कर रहे हैं। कई बार उन्हें अंडरवर्ल्ड और आतंकी संगठनों की धमकी भी मिली लेकिन वह बेखौफ होकर अपने काम में जुटे रहे। मुंबई हमलों में कसाब को दोषी ठहराने और उसे फांसी के तख्ते तक पहुंचाने में निकम का बड़ा योगदान रहा।

पिता भी रहे हैं प्रसिद्ध वकील और जज
उज्‍ज्वल निकम के पिता देवराओजी निकम भी मालेगांव के प्रसिद्ध वकील रहे हैं। उज्‍ज्वल का जन्म महाराष्ट्र के मालेगांव में ही हुआ था। बीएससी की पढ़ाई करने के बाद जलगांव से ही कानून की डिग्री ली और वहीं जिला अदालत में वकालत शुरू कर दी। जल्द ही उनकी पहचान एक क्रिमिनल लॉयर के रूप में बन गई।

जल्द ही उन्हें प्रदेश सरकार ने सरकारी वकील बना दिया। उनकी दमदार पैरवी को देखते हुए ही कोर्ट ने उन्हें आतंक के कई मामलों में सरकार की ओर से पैरवी करने की जिम्मेदारी सौंपी। उज्‍ज्वल निकम के जीवन पर एक फिल्म भी बनाई गई है।

आतंक के मामलों में पैरवी करने के कारण कई बार उन्हें अंडरवर्ल्ड की धमकियों को भी झेलना पड़ा। जिसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें जेड सिक्योरिटी देकर उनकी सुरक्षा बढ़ा दी। आज भी निकम कहीं जाते हैं तो एके 47 से लैस कमांडों चौबीस घंटे उनकी सुरक्षा में मुस्तैद रहते हैं। वह शायद देश के अकेले वकील हैं जिन्हें केंद्र की ओर से जेड कैटेगिरी की सिक्योरिटी दी गई है। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए पिछले साल केंद्र सरकार ने उन्हें पदमश्री से सम्मानित किया।

मुंबई के तमाम बड़े मामलों में निकम ने की है पैरवी
मुंबई और महाराष्ट्र में आतंक और क्राइम के तमाम बड़े मामलों में उज्‍ज्वल निकम ही सरकारी वकील रहे हैं। चाहे वो 1997 में हुआ गुलशन कुमार हत्याकांड हो या मरीन ड्राइव रेप केस जिसमें एक नाबालिग छात्रा से रेप करने वाले एक पुलिस कांस्टेबल को 12 साल की सजा सुनाई गई।

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