भारत की इन दो कंपनियों ने की पीरियड्स के पहले दिन महिलाओं को छुट्टी देने की घोषणा, देखें कर्मचारियों का रिएक्शन

पीरियड्स के दिनों में महिलाओं को किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है इसका दर्द तो वही जानती हैं। लेकिन कामकाजी महिलाओं के लिए इस परेशानी का सामना करना खासा मुश्किल होता है। हालांकि आमतौर पर कहा जाता है कि बाजार में उपलब्ध सेनेटरी नैपकिन के इस्तेमाल से महिलाएं काफी हद तक इस समस्या को खुद को बचाने में कामयाब हो जाती हैं। एक्सपर्ट के अनुसार ये सच नहीं है। क्योंकि पीरियड्स के पहले दिन महिलाओं को असहाय पीड़ा झेलनी पड़ती है। इस दौरान महिलाएं चाहती है कि कुछ पल के लिए वो खुद को इस दुनिया से अलग कर लें। और गर्म पानी लेकर चुपचाप बेड पर लेटी रहें। चॉकलेट खाती रहें। लेकिन कामकाजी महिलाओं को ऑफिस से छुट्टी ना मिलने की वजह से पीरियड्स के पहले दिन ऑफिस जाना पड़ता है। क्योंकि कामकाजी लोग महीने में केजुअल और सिक लीव सहित कुल दो ही छुट्टियां ले सकती हैं। खुद कामकाजी महिलाओं का कहना है कि पीरियड्स के दौरान भी उनपर काम का उतना ही दबाव रहता है जितना दूसरे दिनों में होता है। हालांकि भारत में कुछ निजी कंपनियों ने कामकाजी महिलाओं की समस्या को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। इन कंपनियों ने महिलाओं के लिए इस मामले में कुछ छूट दी है, जिसे दुनियाभर की महिलाएं अपनी कंपनी में लागू होने की कामना करेंगी।

 

पीरियड्स के पहले दिन की छुट्टी की जानकारी जब कंपनी की महिला कर्मचारियों को मिली तो देखिए इन रिएक्शन।

मुंबई की कल्चर मशीन फर्म और गोजुप ने अपनी नई वूमेन फ्रेंडली पॉलिसी के तहत फीमेल कर्मचारियों के लिए पीरियड्स के पहले दिन छुट्टी देने का ऐलान किया है। कंपनी में काम करने वाली महिलाओं का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें कल्चर मशीन के इस फैसले से महिलाएं बहुत खुश नजर आ रही हैं। महिलाओं को जब बताया कि गया कंपनी की नई पॉलिसी के तहत पीरियड्स के पहले दिन फीमेल कर्मचारी को छुट्टी देने का प्रावधान रखा गया है, तो इसे कैमरे में कैद कर लिया गया। वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि इस दौरान महिला कर्मचारी कंपनी के फैसले से काफी खुश नजर आ रही हैं। बता दें कि कल्चरल मशीन कंपनी में करीब 75 महिलाएं काम करती हैं। वहीं कंपनी की एचआर देवलीना ने बतयाा कि उन्होंने पीरियड्स से जुड़ी महिलाओं की परेशानी को ध्यान में रखते ये फैसला लिया है। कंपनी ने इसके साथ ही महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में एक याचिका दाखिल की है जिसमें सरकार से इस पॉलिसी को देशभर में लागू करने का आग्राह किया गया है।

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