समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन के कार्यक्रम में शामिल होंगे पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह

2017 में हुए असेम्बली इलेक्शन से पहले सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और बेटे अखिलेश यादव के बीच बढ़ी खटास अब काम होने लगी है। करीब तीन महीनो बाद आज गुरुवार को समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सीएम अखिलेश यादव पिता मुलायम सिंह यादव से मिलने उनके आवास पहुंचे. सूत्रों की मने तो इस दौरान अखिलेश ने 5 अक्टूबर को आगरा में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में मुलायम को शामिल होने का निमंत्रण भी दिया है, और वो अधिवेशन में शामिल होने के लिए तैयार भी हो गए हैं. आपको बता दें की विक्रमादित्य मार्ग पर दोनों घर अगल बगल हैं जिसके बावजूद तीन महीने बाद दोनों ने मुलाकात की है.

दो दिन पहले मुलायम की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये मना जा रहा था की वो शिवपाल यादव के साथ मिलकर नई पार्टी बनाने का ऐलान कर सकते है पर ऐसा नहीं हुआ. स्टेट कमिटी की मीटिंग में न बुलाये जाने से मुलायम खफा भी थे जिसका असर साफ़ तौर पर उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखा था. उस दौरान उन्होंने अखिलेश की कार्यशैली के साथ ही उन्हें घमंडी तक कह दिया था. साथ ही दूसरी तरफ उन्होंने ये भी कहा कि अखिलेश उनके बेटे हैं, इसलिए उनका आशीर्वाद उनके साथ है. मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि समाजवादी सोच वाले पार्टी से जुड़ें और सपा को मजबूत करें.

समाजवादी पार्टी का 10वां राष्ट्रीय सम्मेलन आगरा में 5 अक्‍टूबर को होगा. सम्मेलन स्थल तारघर का मैदान सदर बाजार, कैंट आगरा में प्रतिनिधि सम्मेलन की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं.सम्मेलन में उत्तर प्रदेश सहित 25 राज्यों के लगभग 15 हजार समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि भाग लेंगे. सम्मेलन में नए संविधान के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर 5 वर्ष के लिए निर्वाचन होगा. 5 अक्टूबर को सुबह 9 बजे झंडारोहण समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव करेंगे. सम्मेलन का उद्घाटन भी राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा. इसी दिन आर्थिक राजनीतिक प्रस्ताव पेश होगा, जिस पर प्रतिनिधि सम्मेलन में चर्चा होगी.

वर्तमान की राजनीतिक स्थिति, केन्द्र सरकार की नीतियों और राष्ट्र के समक्ष अन्य ज्वलंत समस्याओं पर भी विचार होगा. सम्मेलन में 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी पर भी विचार किया जाएगा.सम्मेलन के पहले 4 अक्टूबर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी. शाम 5 बजे अखिलेश यादव प्रेस कॉन्‍फ्रेंस को संबोधि‍त करेंगे. सम्मेलन में भाग लेने के लिए अखिलेश यादव 4 अक्टूबर को लखनऊ से आगरा जाएंगे. इस बीच रास्ते में जगह-जगह उनके स्वागत की तैयारियों की सूचना है. चुनाव हारने के बाद पहली बार अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव से मिलने उनके घर पंहुचे. हालांकि विक्रमादित्य मार्ग पर दोनों के बंगले के बीच सिर्फ एक दीवार का फासला है, लेकिन चुनाव हारने के छह महीने बाद ये फासला तब पाटा जा सका जब पिछले दिनों मुलायम ने शिवपाल की अलग पार्टी बनाने की स्क्रिप्ट पढ़ने से मना कर दिया.

बाप बेटे की ये मुलाकात करीब 25 मिनट चली, जिसमें दोनों तरफ से गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश हुई. सूत्रों के मुताबिक मुलायम अखिलेश के आने से भावुक हो गए, उनका गला रुंध गया. काफी देर तक दोनों चुप रहे. बातचीत की शुरुआत अखिलेश यादव ने की. माना जा रहा है अखिलेश यादव ने उन्हें 5 अक्टूबर को आगरा में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में बतौर संरक्षक आने का निमंत्रण दिया. सूत्रों की माने तो मुलायम ने राष्ट्रीय अधिवेशन में जाने की हामी भर दी है. अगर मुलायम सिंह राष्ट्रीय अधिवेशन का रुख करते है तो शिवपाल यादव के लिए अब सभी रास्ते बंद हो जाएंगे.

पिता पुत्र के बीच रिश्तों पर जमीं बर्फ पिघलने की शुरुआत लोहिया ट्रस्ट में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस से ही शुरू हो गई थी. इसमें मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल के नई पार्टी बनाने की कोशिशों को एक झटके में पलीता लगा दिया था. हालांकि पिता से अध्यक्ष पद छीनने की वजह से मुलायम ने अखिलेश को जी भर कर कोसा था, यहां तक कहा था कि जो अपने बाप का नहीं हुआ वो किसी का क्या होगा.कोसे जाने के बाद भी अखिलेश ने मुलायम सिंह यादव के जिंदाबाद का नारा बुलंद किया था और ट्विटर पर नेताजी और समाजवादी पार्टी जिंदाबाद लिखा. उसी वक्त दर्जनों अखिलेश समर्थक युवा नेता मुलायम से मिलने जा पंहुचे थे और उनके साथ फोटो खिंचवाई थी.

मुलायम सिंह के इस नए यू टर्न को राजनीतिक हलकों में बेहद ही अहम माना जा रहा है. अगर मुलायम अखिलेश के साथ मंच पर खड़े हो गए तो समाजवादी पार्टी फिर से उत्साह से लबरेज हो जाएगी और उसे वो संजीवनी मिलेगी जिसकी उसे 2019 चुनाव में सबसे ज्यादा जरूरत होगी.

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