ज़हीर खान नहीं भरत अरूण को गेंदबाज़ी कोच चाहते हैं रवि शास्त्री

टीम इंडिया के हेड कोच रवि शास्त्री बतौर गेंदबाज़ी कोच भरत अरूण को टीम के साथ जुड़वाना चाहते हैं. जिसे लेकर जल्द ही ऐलान होना भी संभव है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो फिर ज़हीर खान का कद एक बार फिर घट सकता है और फिर वो बतौर कंसलटेंट टीम के साथ विदेशी दौरों पर जुड़ेंगे.

सूत्रों के मुताबिक बीसीसीआई इस मुद्दे पर गंभीर रूप से चर्चा कर रहे हैं और जल्द ही इसे लेकर ऐलान भी किया जा सकता है. साल 2014 से 2016 के बीच जब रवि शास्त्री भारतीय टीम के डायरेक्टर थे तब भी बतौर गेंदबाज़ी कोच भरत अरूण ने उनके साथ काम किया है और वो रवि शास्त्री की पसंद के आदमी भी हैं. शास्त्री और अरूण 1980 में अंडर-19 के दिनों से ही अच्छे दोस्त माने जाते हैं. एन श्रीनिवासन के पास रवि शास्त्री की खास पैरवी की वजह से ही भरत अरूण को पहले भी एनसीए से सीधे भारतीय टीम में एंट्री मिल गई थी.

गेंदबाज़ी कोच को लेकर ये पूरा विवाद सिर्फ पसंद का ही नहीं बल्कि पैसे का भी है. अभी तक गेदंबाज़ी कोच ज़हीर खान की फीस को लेकर सीओए के बीच पेंच फंसा हुआ है. दरअसल ज़हीर खान ने अपने इस पद के लिए बतौर फीस के रूप में 4 करोड़ की मांग की है. जिसे बीसीसीआई मोटी रकम मान रहा है. जिसके बाद वो ये भी विचार कर रहा है कि ज़हीर को भी द्रविड़ की तरह ही सिर्फ प्रमुख सीरीज़ या मौको पर ही बतौर कंसलटेंट टीम के साथ जोड़ा जाए.

हालांकि सीएसी चेयरमैन सौरव गांगुली चाहते थे कि ज़हीन खान बतौर गेंदबाज़ी कोच टीम इंडिया को अपनी पूरी सेवाएं दें. जिसके बाद रवि शास्त्री को हेड कोच, ज़हीर खान को गेंदबाज़ी कोच और राहुल द्रविड़ को विदेशी दौरों पर कंसलटेंट की भूमिका में रखा गया. लेकिन इस बड़े ऐलान के एक दिन बाद ही ऐसी खबरें सामने आईं कि रवि शास्त्री को उनकी पसंद का सपोर्ट स्टाफ नहीं मिला जिसकी वजह से वो खुश नहीं है और भरत अरूण उनकी पसंद का आदमी होगा.इस पूरे मामले में सौरव गांगुली और रवि शास्त्री के बीच चल रही कोल्ड वार का फैसला होना अभी बाकी है. क्योंकि पिछले साल जब बतौर कोच अनिल कुंबले की नियुक्ति हुई थी तब भी सौरव ने रवि शास्त्री के नाम को नकार दिया था और अब एक बार फिर से वो शास्त्री के पक्ष में नहीं थे लेकिन शास्त्री टीम इंडिया के हेड कोच बने.

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