फिर लौटा रैनसमवेयरःभारत समेत पूरी दुनिया पर साइबर अटैक का खतरा

नई दि‍ल्‍ली। दुनि‍याभर में एक बार फि‍र बड़ा साइबर हमला हुआ है। इस बार के हमले में रूस की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी, बैंकों, यूक्रेन के इंटरनेशन एयरपोर्ट सहि‍त ग्‍लोबल शि‍पिंग कंपनी ए पी मोलर मर्स्‍क के कंप्‍यूटर सबसे ज्‍यादा प्रभावि‍त हुए हैं। भारत में फि‍लहाल कि‍सी कंप्‍यूटर को नि‍शाना बनाने की खबर नहीं आई है।

आईटी विशेषज्ञों ने इस वायरस की पहचान ‘गोल्डन-आई’ या ‘पैटव्रैप’ के रूप में की है। यह पिछले साल सामने आए ‘पेट्वा’ वायरस का ही उन्नत रूप है। इसका सबसे बुरा असर यूक्रेन में देखने में आ रहा है। वहां सरकारी मंत्रालयों, बिजली कंपनियों और बैंक के कंप्यूटर सिस्टम में बड़ी खराबी सामने आ रही है। यूक्रेन का सेंट्रल बैंक, सरकारी बिजली वितरक कंपनी यूक्रेनेर्गो, विमान निर्माता कंपनी एंतोनोव और दो डाक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। राजधानी कीव की मेट्रो में पेमेंट कार्ड काम नहीं कर रहे हैं। कई पेट्रोल स्टेशनों को अपना काम-काज रोकना पड़ा है।

इसके अलावा रूस की रोसनेफिट पेट्रोलियम कंपनी, डेनमार्क की समुद्री यातायात कंपनी माएस्क, ब्रिटेन की दिग्गज विज्ञापन कंपनी डब्ल्यूपीपी, फ्रांसीसी कंपनी सेंट-गॉबेन और अमेरिका की दिग्गज दवा कंपनी मेरेक एंड कंपनी ने भी अपने सर्वरों के प्रभावित होने की शिकायत की है।

यूक्रेन के प्रधानमंत्री वोलोदमिर ग्रोएसमैन ने फेसबुक के जरिए साइबर हमले की जानकारी दी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके अहम सिस्टम इस हमले से प्रभावित नहीं हुए हैं।  साइबर हमले की सबसे पहले शिकायत यूक्रेन के बैंकों से ही आई। इस हमले ने पिछले महीने मई में हुए ‘वानाक्राई रेनसमवेयर’ साइबर हमले की याद ताजा कर दी है। इस वायरस ने 150 से ज्यादा देशों के 2 लाख से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया था।

 

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