मुलायम के बाद अब मोदी के पीछे पड़ी यह तेज-तर्रार महिला

नूतन ठाकुर को जानते हैं आप? अमिताभ ठाकुर को? नहीं? चलिए हम बता देते हैं। नूतन वही सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव तथा उस समय के दमदार मंत्री गायत्री प्रजापति की नींद उड़ा दी थी। इसके चलते मुलायम इतने गुस्साए कि उन्होंने नूतन के आईपीएस पति अमिताभ को फोन पर धमकी दे दी थी। अब यही महिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पीछे पड़ गई है।
नूतन ने बताया है कि मोदी की सुरक्षा के खर्चे से जुड़ी एक जानकारी देने से उन्हें इनकार कर दिया गया है। यह जानकारी उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी थी। श्रीमती ठाकुर के अनुसार उन्होंने मोदी की सुरक्षा में लगे कर्मियों और वाहनों के संबंध में जानकारी मांगी थी।
इसके साथ ही उन्होंने इन कर्मियों, वाहनों के ईंधन तथा रखरखाव पर आने वाले खर्च का ब्योरा भी मांगा था। पीएमओ के अंडर सेक्रटरी (आरटीआई) प्रवीण कुमार ने पूरी सूचना देने से इनकार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा तथा सरकारी वाहन के मामले स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) से संबंधित हैं, जो आरटीआई ऐक्ट की धारा 24 के तहत आरटीआई से बाहर हैं। नूतन ने इसी प्रकार की सूचना राष्ट्रपति सचिवालय से भी मांगी थी।
राष्ट्रपति भवन ने जीवन तथा शारीरिक सुरक्षा को खतरा होने के आधार पर राष्ट्रपति के साथ लगे सुरक्षाकर्मियों की कुल संख्या तथा उन सुरक्षाकर्मियों के मूवमेंट के लिए लगाई गई गाड़ियों की संख्या बताने से मना कर दिया था।
राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से बताया गया था कि पिछले 4 साल में राष्ट्रपति के साथ लगे सुरक्षाकर्मियों की सैलरी पर 155.4 करोड़ रुपये तथा सुरक्षाकर्मियों के मूवमेंट के लिए लगी गाड़ियों के रखरखाव में 64.9 लाख रुपये का व्यय आया है। साथ ही यह भी बताया गया था कि गाड़ियों के लिए ईंधन सरकारी पेट्रोल पंप से प्राप्त होता है।
हम बता दें कि मुलायम ने अमिताभ को फोन कर कहा था कि वह नूतन को समझाएं कि वह गायत्री के खिलाफ मुहिम बंद कर दें। श्रीमती ठाकुर ने एक के बाद एक आरटीआई दाखिल कर प्रजापति के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया था। अमिताभ ने यह बातचीत रिकॉर्ड कर ली थी। इसके बाद उन्होंने मुलायम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी थी।
उत्तरप्रदेश के बीते विधानसभा चुनाव से पहले यह अटकल भी लगी थी कि श्रीमती ठाकुर जल्दी ही भाजपा में जा सकती हैं। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। भाजपा की कोशिश थी कि नूतन को अपने साथ लाकर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को तगड़े तरीके से घेरा जा सके।

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