नीतीश का इस्तीफा, कहा- काम करना अब मुश्किल, विकास के लिए BJP से गुरेज नहीं

बिहार की राजीनीति में भूकंप आ गया है। जेडीयू विधायकों के साथ बैठक करने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। नीतीश के इस्तीफे के बाद बिहार के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। नीतीश के इस्तीफे के साथ ही महागठबंधन टूट गया है।
नीतीश कुमार ने बिहार के राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद कहा, अंतर आत्मा की आवाज पर इस्तीफा दिया। अब काम करने का माहौल नहीं रह गया था। हमने गठबंधन धर्म का पालन किया और 20 महीने तक गठबंधन और सरकार चलाई। चुनाव में जनता से जो वादे किए, उस कसौटी पर काम किया लेकिन अब केवल गठबंधन में दरार की ही चर्चा हो रही थी।

उन्होंने गठबंधन और इस्तीफे का ठीकरा लालू प्रसाद पर फोड़ते हुए कहा, हमने कोशिश की। उनसे आरोपों पर जनता के बीच सफाई देने को कहा। जितना संभव हुआ गठबंधन बनाए रखने की कोशिश की। दिल्ली में राहुल गांधी से भी मिले।

बिहार में भी कांग्रेस के नेताओं और प्रभारियों से बात की लेकिन बिहार के हित में कुछ नहीं हो पाया। नीतीश ने साफ किया कि नोटबंदी के दौरान हमने केंद्र सरकार के फैसले का साथ दिया, तो सवाल उठे। तब मैंने ही केंद्र से अपील की थी कि अब बेनामी संपत्ति पर हमला किया जाए। ऐसे में अब लालू चाहते थे कि संकट में उनकी सुरक्षा करूं। मैं कैसे उनके (लालू-तेजस्वी) साथ रहता। भाजपा से संबंधों की याद दिलाते हुए कहा, मैंने राष्ट्रपति चुनाव में भी बिहार की अस्मिता का ध्यान रखते हुए बिहार के गौरव रामनाथ कोविंद का साथ दिया।

उन्होंने बिहार में अपने विकास कार्यों की भी याद दिलाई। कहा, शराबबंदी लागू की। सड़क-पुलिया आदि का निर्माण कराया। लेकिन अब काम करने का माहौल नहीं रह गया था और केवल इसी (महागठबंधन में दरार) की चर्चा हो रही थी।

ऐसे में खुद को अलग करने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा। सोचा खुद नमस्कार करो, जगह त्याग दो। आज मैंने राज्यपाल महोदय को इस्तीफा सौंपा दिया। उन्होंने स्वीकार कर लिया और कहा, तब तक काम संभालें।

आगे की ओर किया इशारा
आगे की ओर इशारे में कहा, आगे क्या होगा देखते रहिए। अभी विधानसभा भंग करने की सिफारिश नहीं की। आगे की साफ होगा क्या होने वाला है। आगे की रणनीति आगे तय होगी। नीतीश कुमार जब राज्यपाल को इस्तीफा सौंपकर राजभवन के बाहर मीडिया से मुखातिब हो रहे थे, तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए इस कदम के लिए बधाई दे दी। यह साफ संकेत था- अब नीतीश के पाले में गेंद है और लालू को नीतीश ने पटकनी दे दी है।

राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने नीतीश कुमार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। आपकों बता दें कि पिछले 20 दिनों से लेकर जेडीयू और आरजेडी के बीच तेजस्वी के इस्तीफे को लेकर गतिरोध जारी था।

SHARE