अयोध्या में कार सेवकों पर फायरिंग: 27 साल बाद विधवा ने दर्ज कराया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ परिवाद

अयोध्या में कार सेवकों पर फायरिंग: 27 साल बाद विधवा ने दर्ज कराया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ परिवाद

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के खिलाफ 27 साल पुराने में मामले में परिवाद दायर कराया गया है. साल 1990 में अयोध्या में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर कारसेवकों पर हुई पुलिस फायरिंग जान गंवाने वाले एक शख्स की विधवा ने परिवाद दायर दर्ज कराया है. मुलायम सिंह यादव के खिलाफ दायर परिवाद में हत्या और षडय़ंत्र का आरोप लगाया गया है. यह घटना दो नवंबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों पर हुई पुलिस गोलीबारी बताई गई है. परिवाद पर प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवींद्र दुबे ने सुनवाई कर आदेश सुरक्षित रखा है.

परिवाद दायर करने वाली महिला गायत्री देवी ने बताया कि अयोध्या में पुलिस गोलीबारी में उसके पति रमेश कुमार पांडे की मौत हो गई थी. परिवाद के साथ 27 नवंबर को प्रकाशित समाचार की प्रति भी संलग्न की है, जिसमें मुलायम सिंह यादव ने अपने 79वें जन्म दिवस पर आयोजित समारोह में सार्वजनिक रूप से कहा था कि इतनी कम सीटें अयोध्या में गोली चलवाने के बाद भी नहीं मिलीं.

परिवादी में कहा गया है कि दो नवंबर, 1990 को दोपहर 12 बजे रामजन्मभूमि आंदोलन में लालकोठी के पास पुलिस गोलीबारी में उसके पति रमेश कुमार पांडे की मृत्यु हुई थी. उस समय से अब तक यह नहीं पता चला था कि यह गोली किसने चलवाई थी. मुलायम का बयान आने के बाद अब इसकी जानकारी हुई है. इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह को तलब कर उन्हें दंड दिया जाना चाहिए.

अयोध्या फायरिंग मामले में मुलायम सिंह यादव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
इससे पहले इसी साल आठ नवंबर को मुलायम सिंह यादव की ओर से अक्टूबर, 1990 में अयोध्या में ‘कार सेवकों’ पर गोली चलाने के आदेश दिए जाने के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए आंदोलन के सिलसिले में कार सेवक शहर में इकट्ठा हुए थे. लखनऊ जिले के निवासी याचिककर्ता राणा संग्राम सिंह ने 3 मई, 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने इस मामले पर उनकी याचिका खारिज कर दी थी.

 

इस मामले पर उनकी याचिका मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश के समक्ष 28 अगस्त, 2014 और 11 फरवरी, 2016 को क्रमश: खारिज कर दिया गया था.

 
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