मोहन भागवत ने किया आरक्षण का समर्थन, कहा-विषमता दूर होने तक मिलना चाहिए लाभ

आरएसएस के सर संघचालक डॉ.मोहनराव भागवत ने जातिगत आरक्षण का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि जब तक देश में जातिगत विषमताएं दूर नहीं हो जातीं, तब तक संवैधानिक लाभ जातियों को मिलना चाहिए।
डॉ. मोहन भागवत आज राजस्थान की राजधानी जयपुर के चित्रकूट स्टेडियम में आयोजित स्वर गोविंदम कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में आरएसएस के सर संचालक डॉ.मोहनराव भागवत, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी समेत भाजपा और आरएसएस के पदाधिकारी मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि जातिप्रथा देश का दुर्भाग्य है और यह समूलनष्ट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सबके सामूहिक हित को ध्यान में रखते हुए समाज में समरसता का संस्कार जरूरी है।

इसके साथ ही उन्होंने अप्रत्यक्ष तौर पर आरक्षण संबंधी संवैधानिक प्रावधानों का समर्थन भी किया। उन्होंने कहा कि जाति भेद के चलते एक बड़ा वर्ग पिछड़ गया। इस विषमता को दूर करने के लिए जाति प्रथा समाप्त होनी चाहिए, लेकिन साथ ही संवैधान में जो प्रावधान किए हैं उनका लाभ ये विषमता दूर होने तक मिलता रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह देश हिंदू राष्ट्र है, लेकिन हिंदू किसी भाषा, समाज या जाति विशेष को लेकर नहीं बना है। इसमें समरसता का भाव है। सबको साथ लेकर चलने और सबको साथ लेकर जीने का संदेश है। इसी लिए तो ‘वासुधैव कुटुम्बकम’ अखंड भारत की पहचान है। हमारी इस पहचान को किसी ने अस्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि समरसता ही मानवता का रूप है।

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