मिलिए बहादुर अफसरों से, जिनके कारण सलाखों तक पहुंचा राम रहीम

बाबा राम रहीम को सलाखों के पीछे भेजने में जितना हौसला पीड़ित साध्वियों ने दिखाया, उतनी ही तारीफ सीबीआई के उस अधिकारी की होनी चाहिए, जिसने इस केस को अंजाम तक पहुंचाया। उन्होंने न सिर्फ दुराचार मामले की जांच की बल्कि पत्रकार छत्रपति हत्याकांड की जांच को भी मुकाम तक पहुंचाया। दुराचार केस के जांच अधिकारी एएसपी सतीश डागर फिलहाल सीबीआई दिल्ली में तैनात हैं।

केस की एक भी तारीख मिस नहीं की
केस की पैरवी जब कोर्ट में शुरू हुई तो डागर ने एक भी तारीख मिस नहीं की। इसका नतीजा यह था कि कोई भी गवाह अपने बयान से नहीं पलटा। डेरा सच्चा सौदा के कृष्ण लाल ने सितंबर 2005 में डागर के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में डागर को जमानत भी लेनी पड़ी थी। हालांकि हाईकोर्ट ने इस केस को बाद में खारिज कर दिया था।

कई बार केस छोड़ने की धमकी मिली

डागर को कई बार केस छोड़ने की धमकी मिली। डेरा अनुयायी उनका घर तक पीछा करते थे। जब तक केस की गवाहियां बंद नहीं हुईं, तब तक वे बराबर कोर्ट में आते रहे। साध्वियों को खोजना भी बहुत मुश्किल भरा काम था, लेकिन डागर ने इस काम को भी अंजाम तक पहुंचाया।

साध्वियों को गवाही देने के लिए तैयार किया
जिन साध्वियों ने बाबा के खिलाफ गवाही दी थी, वे पहले इसके लिए तैयार नहीं हो रही थीं। दोनों की शादी हो चुकी थी। वे अपनी जिंदगी अच्छी तरह से बसर कर रही थीं। एक साध्वी के ससुराल वाले डेरा के समर्थक थे। ऐसे में वह मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं थीं। डागर ने पहले उनके ससुराल वालों को समझाया और फिर साध्वियों को मानसिक रूप से तैयार किया। उनकी सुरक्षा और कोर्ट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली।

रामचंद्र छत्रपति केस को भी मुकाम तक पहुंचाया
पत्रकार रामचंद्र हत्याकांड को अंजाम तक पहुंचाने का श्रेय सीबीआई अधिकारी सतीश डागर को जाता है। रामचंद्र के बेटे अंशुल ने बताया कि जब उसने अपने पिता का केस लड़ने का फैसला लिया तो उन्हें काफी दबाव झेलना पड़ा। मगर सतीश डागर ने उनमें विश्वास पैदा किया। उन्होंने ही अंशुल को हौसला दिया कि वे केस लड़े और सीबीआई की पूरी टीम उनके साथ है। डागर पर नेताओं और अफसरों ने भी काफी दबाव डाला, लेकिन वे बिल्कुल भी नहीं झुके।

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