माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी के सबूत नहीं, CPS ने वकील के तर्कों की उड़ाईं धज्जियां

माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी के सबूत नहीं, CPS ने वकील के तर्कों की उड़ाईं धज्जियां
विजय माल्या के प्रत्यर्पण मामले में सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से अभियोजन पक्ष ने बचाव पक्ष के सबूतों की धज्जियां उड़ा दीं। क्राउन प्रोसेक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने मंगलवार को अदालत में माल्या के पक्ष में पेश राजनीतिक विशेषज्ञ के दावे को खारिज कर दिया। बचाव पक्ष ने दोषपूर्ण सबूत पेश करने के लिए सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय पर सवाल उठाया था।
माल्या को भारत भेजने के लिए वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई पांचवें दिन भी जारी रही। इसमें आरोपी के पक्ष में राजनीतिक विशेषज्ञ लॉरेंस सीज को पेश किया गया। सीज ने भारतीय राजनीतिक व्यवस्था पर अपनी राय दी। उन्होंने सीबीआई की निष्पक्षता खास कर उसके विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की नियुक्ति पर सवाल उठाया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई को ‘अपने मालिकों की जुबान बोलने वाले पिंजरे का तोता’ कहे जाने का भी जिक्र किया। इस पर भारत सरकार का पक्ष रखने वाले मार्क समर्स ने 1997 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का जिक्र किया और जोर देकर कहा कि उस फैसले से केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का गठन हुआ, जो स्वतंत्र रूप से सीबीआई पर निगरानी रखता है।

माल्या का बचाव कर रहे वकीलों की दलील है कि भारत सरकार की ओर से उनके खिलाफ लगाए गए धोखाधड़ी के आरोपों के कोई साक्ष्य नहीं हैं। माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई चल रही है। 61 वर्षीय माल्या भारत में वांछित हैं। उनके खिलाफ 9000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग के आरोप हैं

सुनवाई के दूसरे दिन माल्या की वकील क्लेयर मोंटगोमेरी ने अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी के कोई साक्ष्य नहीं हैं।  इससे पहले, सोमवार को भारत सरकार की ओर से कोर्ट में बहस करते हुए क्राउन प्रोसीक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने कहा था कि शराब कारोबारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला बनता है, जिसका उन्हें जवाब देना है।

वहीं मोंटगोमेरी का दावा है कि सीपीएस की ओर से भारत सरकार की निर्देश पर जो साक्ष्य पेश किए गए हैं, उनसे लगता है कि फ्राड की राशि ‘शून्य’ है। यह भारत सरकार की ओर से बड़ी नाकामी है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के पास इस मामले का समर्थन करने के लिए विश्वसनीय तर्क नहीं है कि माल्या ने धोखे से कर्ज लिया और उनका कर्ज चुकाने का कोई इरादा नहीं है, क्योंकि घाटे में चल रही किंगफिशर एयरलाइंस को लाभ का अनुमान भरोसा करने लायक नहीं है।

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