यौन शोषण की खौफनाक कहानियां; …जब दरिंदों ने मंदिर के अंदर भी नहीं बख्शा

सोमवार (17 अक्टूबर) को जब हॉलीवुड अभिनेत्री एलीसा मिलाने ने ट्विटर पर अपने फॉलोवर्स  से यौन शोषण के खिलाफ मुहिम शुरू की तो उन्हें उम्मीद भी नहीं रही होगी सात समंदर पार भी ये अभियान जोर पकड़ लेगा। सोमवार को एलीसा ने ट्विटर पर लिखा, “अगर आपका यौन शोषण हुआ है या आप पर यौन हमला हुआ है तो कमेंट बॉक्स में जवाब में Me Too (मैं भी) लिखें।” एलीसा ने अपने ट्वीट के साथ एक स्क्रीन शॉट शेयर किया है जिसमें कहा गया है कि एक दोस्त का सुझाव है कि अगर यौन शोषण और यौन हमले की शिकार सभी महिलाएं Me Too लिखें तो शायद दुनिया को समझ आए कि ये मामला कितना व्यापक और कितना गंभीर है।

एलिसा के सोमवार को किए ट्वीट पर अब तक 57 हजार लोग जवाब दे चुके हैं। 20 हजार लोगों ने उसे रीट्वीट किया है और 41 हजार लोगों ने उनका ट्वीट लाइक किया है। एलिसा के ट्वीट के बाद कई दूसरे हॉलीवुड सेलेब ने #MeToo हैशटैग के साथ ट्विट किए। देखते ही देखते #MeToo कैंपेन ट्विटर से फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे दूसरे सोशल मीडिया मंच तक पहुंच गया। फेसबुक पर करीब 60 लाख लोगों ने #MeToo का प्रयोग अपने पोस्ट या कमेंट में इस्तेमाल किया। सेलेब के अलावा आम लड़कियों और महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में इस हैशटैग का इस्तेमाल करके आपबीती सुनायी है। लड़कियों के साथ ही कई लड़कों ने भी इस हैशटैग का इस्तेमाल करके बताया है उनका भी यौन शोषण हो चुका है।

हॉलीवुड डायरेक्टर हार्वे वींसटन द्वारा किए गए यौन उत्पीड़नों के खिलाफ सोशल मीडिया पर #Metoo नाम से एक कैंपेन चलाया जा रहा है जिसका मकसद यह है कि दुनिया में जितनी भी महिलाएं यौन शोषण या किसी भी गंदगी का शिकार हुई हैं, तो वे बिना किसी झिझक के अपना अनुभव शेयर कर सकें। सभी देशों के लोग इस कैंपेन के जरिए अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। वहीं भारत की बात करें तो एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक पांच मिनट में एक महिला छेड़छाड़ का शिकार होती है। भारतीय महिलाओं ने भी अपने साथ घटी घटनाओं को सोशल मीडिया पर साझा किया है। महिलाओं ने बताया कि कैसे वे मंदिर जैसी पवित्र जगहों और अपने घरों में यौन उत्पीड़न का शिकार हुई हैं। आज हम आपको ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहनी बताने जा रहे हैं, जो कि कहीं न कहीं पुरुषों की गंदी नजर का शिकार हुई हैं।

वैशाली खुलबे जो कि पूर्वी दिल्ली की रहने वाली हैं, उन्होंने बताया कि जब वे 4-5 साल की थीं, तब वे यौन उत्पीड़न का शिकार हुई थीं। बस, मेट्रो, क्लब, रोड़ या चाहे घर हो हर जगह महिलाओं का शोषण किया जाता है। मैंने पब्लिक में पुरुषों को मास्टरबेट करते देखा है। जब भीड़ में होते हैं तो कपड़ों में हाथ डालने की कोशिश होती है, शरीर की किसी जगह को छूने के लिए पिंच करते हैं और कई बार तो पीछा भी होता है।

चंदना भौमिक लिखती हैं, मैं दस कजिन जो कि लड़के हैं उनके साथ बड़ी हुई हूं। हमेशा हमारे साथ एक जैसा बर्ताव किया जाता था। सच बोलूं तो सबसे पहले इसका अहसास मुझे पांच साल की उम्र में हुआ था और एक लड़की होने के नाते में पहली बार डरी थी, जब मेरे एक रिश्तेदार ने गलत तरीके से मेरे सीने पर हाथ फेरा था। जब मैं टीनेज थी तब तिरुपति मंदिर में किसी ने मेरे पीछे के अंग पर अपना हाथ टटोला जब्कि मैंने उस समय पूरे कपड़े पहने हुए थे। इसके बाद जब मैंने इंटर्नशिप करना शुरु किया तो मेरे मार्केटिंग हेड ने मुझसे मेरा शरीर साझा करने की बात कही  ताकि वो अपनी क्रिएटीविटी से मुझे प्ररेणा दे सके। पूर्व पति ने मेरे साथ रेप किया था। ऑफिस में मेरे साथ काम करने वाले मुझे गंदे-गंदे मैसेज भेजते थे। जब मैंने इन सबका विरोध करना शुरु किया तो मुझे फेमिनिस्ट और न जाने क्या-क्या कहा गया।

SHARE