पुराने कार और गहनों की बिक्री पर नहीं लगेगा जीएसटी

1 जुलाई से पूरे देश में जीएसटी लागू होने के बाद से सोने की पुरानी ज्वैलरी को पैसे या नई ज्वैलरी बनवाने के लिए बेचने पर क्या असर पड़ेगा? भारत में सोने की ज्वैलरी की अहमियत को देखते हुए ऐसे बहुत से लोग हैं जो इन अफवाहों से परेशान हैं कि अब वह पुराने सोने की ज्वैलरी को बेचना चाहेंगे तो उन्हें जीएसटी के दायरे में ले लिया जाएगा। इस अफवाह का असर सोना कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। विभाग ने राजस्व सचिव हसमुख अधिया की ओर से बुधवार को की गई टिप्पणी पर यह स्पष्टीकरण दिया है। विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जीएसटी मास्टर क्लास में बुधवार को सूचित किया गया कि सर्राफा कारोबारी द्वारा किसी उपभोक्ता से पुराने गहने खरीदने पर केंद्रीय जीएसटी कानून, 2017 की धारा 9 (4) के प्रावधानों के तहत उलट शुल्क व्यवस्था में तीन फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा।

राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह सिद्धांत पुरानी कार या दोपहिया की बिक्री पर भी लागू होगा। इस पर भी जीएसटी नहीं लगेगा।  विभाग ने आगे कहा है कि यदि कोई गैर पंजीकृत इकाई किसी पंजीकृत आपूर्तिकर्ता को पुराने सोने के आभूषण बेचती है, तो उस पर कर लगेगा।  इसी तरह कोई सोने के आभूषण की आपूर्ति करने वाला गैर पंजीकृत व्यक्ति यदि इसे किसी पंजीकत आपूतर्किर्ता को बेचता है, तो आरसीएम के तहत इस पर कर लगेगा। सीमा शुल्क विभाग ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी से छूट प्राप्त वस्तुओं के आयातकों व निर्यातकों को जीएसटी पंजीकरण संख्या (जीएसटीआईएन) लेना जरूरी नहीं है। उनकी निर्यात-आयात खेप को पैन संख्या के आधार पर ही मंजूरी दी जा सकती है। विभाग ने कुछ मीडिया रिपोर्टों के बीच यह स्पष्टीकरण जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार नई जीएसटी प्रणाली के तहत नियमों के इंतजार के चलते कुछ खेपों को आगे बढ़ाने में बंदरगाहों पर देरी हो रही है। सीमा शुल्क विभाग के महाराष्ट्र प्रकोष्ठ ने इस बारे में सार्वजनिक सूचना जारी की है।

वित्त मंत्री की सफाई से साफ है कि ज्वैलरी कारोबारियों को ग्राहकों से पुरानी ज्वैलरी के लिए कोई टैक्स नहीं वसूलना होगा क्योंकि यह ट्रांजैक्शन जीएसटी से बाहर रहेगा। गौरतलब है कि वित्त मंत्री को इस मुद्दे पर सफाई इसलिए देनी पड़ी क्योंकि एक दिन पहले रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अधिया ने जीएसटी समझाते हुए कहा था कि पुरानी ज्वैलरी खरीदने पर ज्वैलर्स को 3 फीसदी टैक्स देना होगा।

वित्त मंत्री कहा कि इस पुरानी ज्वैलरी पर दी गई इस छूट का फायदा ज्वैलर न उठा सकें, इसलिए इस ट्रांजैक्शन पर सेफ्टी नेट का इस्तेमाल किया गया है. जेटली ने बताया कि यदि कोई ऐसा सोने की ज्वैलरी का सप्लायर जिसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है और वह एक रजिस्टर्ड सप्लायर को ज्वैलरी बेचता है तो उसे 3 फीसदी की दर से रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के मद में जीएसटी का भुगतान करना होगा।

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