डोकलाम विवाद: तो इस वजह से ढाई महीने बाद भारत के आगे झुका चीन?

भारत और चीन के बीच करीब ढाई महीने से तनाव का कारण बना दोकलम विवाद आखिरकार हल हो गया है। जबरदस्त कूटनीतिक तनातनी के बाद दोनों देश सिक्किम सेक्टर के विवादित दोकलम क्षेत्र से अपनी-अपनी सेनाओं को एक साथ हटाने पर सहमत हो गए हैं। यह सहमति ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने अगले हफ्ते चीन जाने वाले हैं।
इसे चीन पर भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल भारत जहां लगातार विवादित क्षेत्र से सेना हटाने के बाद कूटनीतिक बातचीत के जरिए विवाद का हल निकालने पर जोर दे रहा था, वहीं चीन की ओर से भारत को लगातार युद्घ की धमकियां मिल रही थी।

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को इस विवाद का हल निकलने की जानकारी देते हुए कहा कि भारत बीते कुछ हफ्तों में कूटनीतिक बातचीत में चीन को अपनी चिंताओं और हितों को समझाने में कामयाब रहा है। सहमति के बाद दोनों देश दोकलम से अपनी-अपनी सेनाएं तेजी से पीछे हटा रहे हैं।

चीन ने विवाद का हल निकलने की आधिकारिक पुष्टि तो की, लेकिन भारत के दावों के उलट कहा कि चीन नहीं बल्कि भारत विवादित क्षेत्र से अपनी सेना हटा रहा है। चीन ने विवादित क्षेत्र में पेट्रोलिंग जारी रखने की भी घोषणा की। हालांकि भारतीय पक्ष का दावा है कि इस मामले में बेहद कड़ा रवैया अपनाने के कारण अब चीन अपनी छवि बचाने के लिए इस तरह का दावा कर रहा है। हकीकत यही है कि दोनों साथ-साथ पीछे हट रहे हैं। दोकलम में भारत के 350 सैनिक तैनात थे, जहां 16 जून को चीन द्वारा सड़क बनाने की कोशिश के कारण तनाव शुरू हुआ था।

ब्रिक्स बनी विवाद के हल की वजह

चीन में 3-5 सितंबर तक होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन विवाद के हल की असली वजह बना। चीन नहीं चाहता था इतने बड़े और इतने महत्वपूर्ण सम्मेलन में डोकलाम विवाद के कारण तनावपूर्ण माहौल बने। भले ही रूस ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों से भारत के रिश्ते बेहद मधुर हैं। दक्षिण चीन सागर विवाद के कारण चीन की अंतरराष्ट्रीय छवि वैसे भी बहुत खराब हो चुकी है। ऐसे में चीन अपनी मेजबानी में हो रहे सम्मेलन में अपनी छवि को और नहीं बिगाड़ना चाहता था।

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