बुलेट ट्रेन परियोजना के विरोध में उतरे किसान , किया प्रदर्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट शिलान्यास कर रहे थे तो वहीं दूसरी ओर बुलेट ट्रेन का विरोध किया। पालघर जिले के बोईसर रेलवे स्टेशन पर आदिवासी व किसान संगठनों ने ट्रेनों को काले झंडे दिखा प्रदर्शन किया। साथ ही ‘बुलेट ट्रेन हटाओ, लोकल ट्रेन सुधारों ‘ जैसे नारे लगाए।

पालघर जिले के बोईसर के किसानों के एक समूह ने गुरुवार को अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन किया. उन्हें आशंका है कि इस परियोजना के चलते उन्हें अपनी जमीन से हाथ धोना पड़ सकता है ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की यात्रा पर आए जापान के उनके समकक्ष शिंजो आबे ने गुजरात के अहमदाबाद में इस परियोजना की शुरुआत की। बोईसर रेलवे स्टेशन के बाहर प्रदर्शन करने वाले किसानों ने कहा कि अगर परियोजना के लिए उनकी खेती वाली जमीन का अधिग्रहण किया गया तो वे बर्बाद हो जाएंगे।

शेतकारी संघर्ष समिति और आदिवासी एकता परिषद द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाए और परियोजना के खिलाफ नारेबाजी की।
आदिवासियों ने बुलेट ट्रेन के विरोध में प्रदर्शन कर बुलेट ट्रेन को एक इंच जमीन न देने का ऐलान किया भूमि सेना के अध्यक्ष कालू काका धोधड़े ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि बुलेट ट्रेन के लिए भूमि मिली नहीं और भूमि पूजन कर दिया गया है। धोधड़े ने सरकार को चेतावनी दी कि बुलेट ट्रेन व वाढ़वन बंदरगाह के लिए लगने वाली जमीन से बड़ी संख्या में किसान व आदिवासी भूमिहीन हो जाएंगे जिससे बर्दाश्त नही किया जाएगा।

सरकार अगर बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट रद्द नहीं करती तो मोदी सरकार के विरुद्ध जन आंदोलन छेड़ा जाएगा आदिवासी नेताओं ने आरोप लगाया की पालघर की कई ग्रामपंचायत पेशा कानून के तहत आती है कानून में साफ तौर पर कहा गया है कि बिना वहां के ग्रामवासियों की मर्जी के किसी प्रोजेक्ट के लिए जमीन नही ली जा सकती है। सरकार पेशा कानून की धज्जियां उड़ा आदिवासियों व किसानों की जमीन हड़प रही है। मुम्बई से अहमदाबाद तक जाने वाली बुलेट ट्रेन के संभावित स्टेशनों में बोईसर भी शामिल है। विरोध करने में आदिवासी एकता परिषद, शेतकरी संघर्ष समिति, भूमिसेना, सूर्य पाणी बचाव, युवा भारत, वाढवणं बंदर विरोधी, कष्टकरी संघटना, अध्यक्ष शेतकरी संघर्ष समिति के साथ कालू राम धोधड़े सैकड़ों आदिवासी व किसान मौजूद थे।

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