आर्मी चीफ बिपिन रावत बोले- जंग का तरीका बदला, बॉर्डर पर चलानी होंगी बख्तरबंद गाड़ियां

आर्मी चीफ बिपिन रावत बोले- जंग का तरीका बदला, बॉर्डर पर चलानी होंगी बख्तरबंद गाड़ियां
सेना प्रमुख बिपिन रावत ने बुधवार को सीमा पर बख्तरबंद गाड़ियों को चलाने की क्षमता पर जोर दिया। पाकिस्तान और चीन से मिल रही चुनौतियों के बीच उन्होंने कहा कि इलाके के स्वरूप में बदलाव आ रहा है और ऐसे में भविष्य में होने वाली किसी भी जंग के लिए हमें खुद को तैयार रखना होगा।
रावत ने जोर देकर कहा, ‘सैन्य वाहन जैसे – युद्धक टैंक व बख्तरबंद गाड़ियों में पश्चिम के साथ उत्तरी सीमा पर भी संचालित किए जाने की क्षमता होनी चाहिए। भविष्य में होने वाली युद्ध की प्रकृति मिलीजुली होगी और सुरक्षा बलों को इससे निपटने के लिए क्षमता के निर्माण की जरूरत है।’ नई दिल्ली में आयोजित ‘फ्यूचर आर्मर्ड व्हीकल्स इंडिया 2017’ पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने यह बयान दिया।


उन्होंने यह भी कहा कि थार मरुस्थल का कुछ हिस्सा सख्त होता जा रहा है। नहरों के विकास के साथ ही बंजर जमीनें हरी हो रही हैं और जनसंख्या घनत्व बढ़ रहा है। यह स्थिति चुनौतियां पेश कर रही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नहर के विकास के साथ हमें पुलों की जरूरत पूरी करनी है। हमें यह देखना है कि यह बख्तरबंद गाड़ियां किस तरीके से वहां काम कर पाएंगी। रावत ने कहा कि इसलिए मेरा मानना है कि हम जो भी हथियार इस्तेमाल करने वाले हैं, वह दोनों मोर्चों पर काम करने में सक्षम होने चाहिए।

युद्धक्षेत्र हो जाएंगे जटिल
सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र जटिल होंगे और युद्ध की प्रकृति हायब्रिड हो जाएगी। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक क्षमताओं को बढ़ाने की जरूरत है। रावत ने कहा कि पारंपरिक युद्ध की तुलना में अब लड़ाई का तरीका बदल गया है। ऐसे में नए तरीकों की अनदेखी नहीं की जा सकती। और निसंदेह युद्ध के दौरान अंतरिक्ष और साइबर का इस्तेमाल बढ़ेगा। ऐसी परिस्थितियों में लड़ने के लिए हमें उसी प्रकार के हथियारों और तकनीक की जरूरत होगी।

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