बायोसेंसर से शुरुआती चरण में होगी डेंगू की पहचान

शोधकर्ताओं ने एक ऐसा बायोसेंसर विकसित किया है जिसके जरिये रक्त की जांच से डेंगू वायरस का तुरंत पता चल सकता है। इससे इस घातक बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता लगाने के लिए किए जाने वाले पेपर आधारित परीक्षण की कीमत में कमी आ सकती है। यह पयार्वरण के अनुकूल और दोबारा इस्तेमाल करने योग्य भी है।पर्यावरण के अनुकूल और दोबारा इस्तेमाल करने योग्य एक नया बायोसेंसर ईजाद किया गया है जिससे रक्त के नमूनों से डेंगू वायरस का तुरंत पता चल सकता है. इस खोज से डेंगू जैसी प्राणघातक बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता लगाने के लिए पेपर आधारित टेस्ट की कीमत में कमी आ सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, डेंगू भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महामारी है. वर्ष 2015 में देशभर में डेंगू के कुल 99,913 मामले सामने आए थे और 220 लोगों की मौत हो गई थी।डेंगू में बहुत तेज बुखार चढ़ता है और इससे मौत भी हो सकती है. यह बीमारी चार डेंगू वायरस की प्रजातियों मे से किसी एक से संक्रमित मच्छर के काटने से होती है.मौजूदा जांच के तरीकों से सभी चार तरह के डेंगू वायरस की पहचान नहीं की जा सकती.

प्रभावी और बहु उपयोगी सेंसर बनाने के लिए नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी, हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने फ्लोरीन मिले हुए टिन ऑक्साइड इलेक्ट्रॉड पर जिंक ऑक्साइड, पैलेडियम और प्लेटिनम के नैनोपार्टिकल्स को एकत्रित कर यह बायोसेंसर बनाया.बीमारी के प्रसार को देखते हुए नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी और हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इसका एक प्रभावी और बहु-उपयोगी सेंसर विकसित करने में जुटे थे।

उन्होंने फ्लोरीन मिले हुए टिन ऑक्साइड के इलेक्ट्रॉड पर जिंक ऑक्साइड, पैलेडियम और प्लेटिनम के सूक्ष्म कणों को एकत्रित कर यह बायोसेंसर बनाया। एमिटी यूनिवर्सिटी की सहायक प्रोफेसर जागति नारंग ने कहा, ढाई साल पहले उत्तर भारत में डेंगू का खासा प्रकोप था। दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश खास तौर पर डेंगू की चपेट में थे। लेकिन अब तक इस बीमारी के लिए कोई टीका नहीं है। ऐसे में एहतियात बरतने के लिए शुरुआती स्तर पर ही इसका पता लगाना जरूरी है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस बायोसेंसर में एक चिप का इस्तेमाल किया गया है। इस चिप सेंसर की मदद से डेंगू वायरस की सभी तरह की प्रजातियों का पता लगाया जा सकता है। यह शोध-अध्ययन ‘बायोसेंसर्स एंड बायोइलेक्ट्रॉनिक्स’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

गौरतलब है कि डेंगू वायरस जनित बीमारी है। यह डेंगू वायरस की चार प्रजातियों में से किसी एक से संक्रमित मच्छर के काटने से होती है। इसमें बहुत तेज बुखार चढ़ता है। सर, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर पर खराश भी इसके लक्षण हैं। इससे मौत भी हो सकती है। मौजूदा जांच के तरीकों से सभी चार तरह के डेंगू वायरस की पहचान नहीं की जा सकती।

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