अन्ना हजारे करेंगे बीजेपी के खिलाफ सत्याग्रह , नहीं बन पाएगा कोई केजरीवाल जैसा

समाजसेवी अन्ना हजारे 6 साल बाद एक बार फिर आंदोलन की राह पर है. अन्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर भ्रष्टाचार और किसानों की समस्‍याओं पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी, जिसके बाद गांधी जयंती के मौके पर राजघाट पर एक दिन का सत्याग्रह पर बैठे. अन्ना हजारे ने कहा कि 6 साल गुजर जाने के बाद भी जनलोकपाल नहीं आ सका है. मोदी सरकार भ्रष्टाचार को रोकने में फेल है और जनलोकपाल व लोकायुक्त को लेकर गंभीर नहीं है. अन्ना ने कहा अगर सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती तो दिसंबर या अगले साल जनवरी से फिर वे संघर्ष के लिए मैदान में उतरेंगे.

अन्ना हजारे ने गांधी जयंती के मौके पर राजघाट पर सत्याग्रह किया. इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार को कोसते हुए दिसंबर या जनवरी में फिर आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दे दी. यही नहीं, अन्ना ने दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि, “अरविन्द मुझे पूछेगा नहीं और यदि पूछेगा तो मैं उससे कहुंगा कि वो मुझसे पांच कदम दूर रहे.” अन्ना ने आंदोलन के बारे में यह स्पष्ट बताया कि इस बार आंदोलन में शामिल होने वाले लोग राजनीति में नहीं जाएंगे. उन्होंने कहा कि, “जो भी मेरे साथ आंदोलन में आएगा उन्हें यह एफिडेविट देना होगा कि वो राजनीति में नहीं जाएंगे और यदि जाएंगे तो मैं उन्हें कोर्ट ले जाऊंगा.”

बता दें कि अन्ना हजारे ने रविवार को कहा था कि देश महात्मा गांधी के सपने के रास्ते से भटक गया है. इसीलिए वह गांधी जयंती के मौके पर एक दिन का सत्याग्रह करेंगे. इसी मद्देनजर सोमवार को अन्ना हजारे गांधी समाधि पर पहुंचकर सत्याग्रह शुरू किया. दरअसल, पिछले दिनों अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर भ्रष्टाचार और किसानों की समस्‍याओं पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और आंदोलन करने की भी बात कही थी.

समाजसेवी अन्ना हजारे जी  की दस मांगे

1- राजनीतिक दलों को भी सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में लाया जाना चाहिए, सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसका आह्वान किया है.

2- देश में नारी सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए. महिलाओं को हो रहे अन्याय के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाए.

3- देश के अलग राज्य में किसान आंदोलन कर रहे हैं और आत्म हत्या भी, लेकिन सरकार किसानों के मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं

4-विदेशों में जमा काला धन को वापस भारत लाया जाए. नोटबंदी से देश छुपाए काला धन का जनता को हिसाब मिले.

5-लोकपाल का मुख्यालय, सीवीसी, सीबीआई और अधिकारीयों का स्तर और धारा 44 में लोकपाल के दायरे में रखे गये अधिकारीयों और कर्मचारियों की   संपत्ती घोषित करने के बारे में प्रावधान हो.

6- किसानों को उपज के पैदावारी के आधार पर उचित दाम मिले .

7- भ्रष्टाचार के रोकने वाले कानून जनलोकपाल और राज्य में लोकायुक्त नियुक्त करने की मांग.

8- किसानों की समस्याओं को लेकर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करे.

9- गांधी के सपने वाला चाहिए देश. आजादी के 70 साल बाद भी स्वतंत्रा सेनानियों का सपना साकार नहीं हो सका

10- नागरिक संहिता पर अमल हो.

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