यूएन ने पाकिस्‍तान पर कोई भी बैन लगाया तो रूस और चीन देंगे साथ

चीन और रूस ने पाकिस्तान को राजनयिक स्तर पर यह आश्वासन दिया है कि यदि आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करने में नाकाम रहने पर अमेरिका पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक प्रतिबंध लगाने का कोई भी कदम उठाता है तो वे अपने वीटो का इस्तेमाल करेंगे। मीडिया की रिपोर्ट में आज यह बात कही गई। मालून हो कि अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने के लिए इस्लामाबाद की आलोचना की थी, इसके बाद ही पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संबंध खराब हुए हैं।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून और उससे ही जुड़ी प्रकाशन संस्था डेली एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका ने उन पाकिस्तानी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए हैं, जिनके आतंकवादियों के साथ कथित तौर पर संबंध हैं। प्रधानमंत्री शाहिद खान अब्बासी ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि पाकिस्तानी अधिकारियों पर लक्षित प्रतिबंध से अमेरिका के आतंकवाद विरोधी प्रयासों में कोई सहायता नहीं मिलेगी।

चीन और रूस ने पाकिस्तान को राजनयिक स्तर पर यह आश्वासन दिया है कि अगर अमेरिका पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक प्रतिबंध लगाने का कोई भी कदम उठाता है तो वे अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करेंगे. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह गाह मुहैया कराने के लिए इस्लामाबाद की आलोचना की थी. जिसके बाद से पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संबंध खराब हुए हैं.

पाकिस्तानी अखबार डेली एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका ने उन पाकिस्तानी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए हैं, जिनके आतंकवादियों के साथ कथित तौर पर संबंध हैं. इसके जवाब में प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि पाकिस्तानी अधिकारियों पर लक्षित प्रतिबंध से अमेरिका के आतंकवाद विरोधी प्रयासों में कोई सहायता नहीं मिलेगी.

वहीं, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, पाकिस्तान वीटो पावर रखने वाले चीन और रूस के साथ संपर्क में है. जिन्होंने पाकिस्तान पर अनावश्यक दबाव बनाने की अमेरिकी नीति का विरोध किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों महाशक्तियों ने इस्लामाबाद को सभी मंचों पर हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है. पाकिस्तान फ्रांस और ब्रिटेन जैसे अन्य पश्चिमी देशों से भी संपर्क करेगा.

बता दें कि अमेरिका की नई रणनीति की घोषणा के बाद ट्रंप प्रशासन के सहयोगियों और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच कोई उच्च स्तरीय संपर्क नहीं है. हालांकि, अमेरिकी राजदूत डेविड हाले ने इस्लामाबाद में पाकिस्तानी नागरिक और सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की है. बदले परिदृश्य में पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति की आलोचनाओं के बीच समर्थन जुटाने के लिए अहम अंतरराष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय देशों से संपर्क करना शुरू कर दिया है. विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस सप्ताह चीन, तुर्की और ईरान की यात्रा की है.

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