क्या यूपी फिर बनेगा महाकाल

संवाददाता, दिल्ली- – राष्ट्रपति को लेकर चल रही हलचल में सियासी गणित सही बैठा तो यूपी का ‘पावर सेंटर’ बनना तय है। बिहार के राज्यपाल और कानपुर निवासी रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति बने तो देश के इतिहास में पहली बार सर्वोच्च संवैधानिक पद पर यूपी काबिज होगा। यही नहीं, यह संयोग भी पहली बार होगा कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तीनों ही एक ही राज्य की अगुआई करते हों। इस तरह रायसीना हिल्स से लेकर 7 रेसकोर्स (अब लोक कल्याण मार्ग) तक की कमान यूपी के हाथ में होगी।

बीजेपी ने रामनाथ कोविंद को देश के प्रथम नागरिक के दावेदार के तौर पर पेश किया है। राजनीतिक समीकरण साधने और विरोधियों को चित करने की इस कवायद में सबसे बड़े लाभार्थी के रूप में यूपी निकल कर आ रहा है। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन का नाता जरूर यूपी से था, लेकिन मूलत: उनका परिवार हैदराबाद का था और वहीं उनका जन्म भी हुआ था। अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस से सांसद हैं और गृह मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ के सांसद हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लखनऊ आने से पहले ही यहां का सियासी पारा चढ़ा दिया है। उनके इस फैसले से उनकी धुर विरोधी मायावती जैसी नेता भी उनके पाले में आ खड़ी हुई हैं। वहीं, भीम सेना जैसे संगठनों के उभार से यूपी में आए राजनीतिक भूचाल को भी वह बैलेंस करते दिखे हैं। अब मंगलवार को सीएम आवास पर पीएम के सम्मान में होने वाले डिनर का राजनीतिक महत्च और बढ़ गया है क्योंकि इसमें पूर्व सीएम भी बुलाए गए हैं। यूपी के दो पूर्व सीएम अखिलेश यादव और मायावती अपनी पार्टी की मुखिया भी हैं और बीजेपी उम्मीदवार को निर्णायक वोट दिलाने में इनका भी निर्णय मायने रखेगा।

यूपी से रामनाथ कोविंद को प्रथम नागरिक बनाने की रेस में खड़ा कर पार्टी ने आखिरी पंक्ति में खड़े कार्यकर्ता की उम्मीदों को भी थपथपाया है। केंद्र के बाद प्रदेश में भी यूपी सरकार बनने के बाद भी समुचित समायोजन न होने के कारण कार्यकर्ताओं में असंतोष के स्वर भी गाहे-बगाहे उभरने शुरू हो गए हैं। संघ के कुछ पदाधिकारियों ने भी सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट के जरिए इस ओर इशारा किया है। चुनाव के दौरान टिकट वितरण से लेकर नई सरकार की कैबिनेट तक में ‘बाहरियों’ का जलवा कायम है। ऐसे में राष्ट्रपति पद पर भी कोई ‘पैराशूट’ चुना जाना समस्या खड़ी कर सकता था। कोविंद पार्टी के लंबे समय से आम कार्यकर्ता रहे हैं। उनको चुनकर मोदी-शाह ने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि देर-सवेर कार्यकर्ताओं की सुनवाई जरूर होगी। वहीं, संघ के ‘स्वयंसेवक’ को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने की शर्त भी पूरी हो गई है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन का कहना है कि कोविंद पार्टी के अंत्योदय का चेहरा हैं। पीएम ने वास्तविक अर्थों मे सबका साथ, सबका विकास की संकल्पना को साकार किया है

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